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नो l
 हम जो सोचते हैं , वो बन जाते हैं.
 
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Views: 254 | Added by: manoj | Date: 30/01/2012 | Comments (0)



आज मैं आपके साथ मशहूर लेखक  Chetan Bhagat (चेतन भगत) द्वारा दी गयी एक बेहद Inspirational Speech Hindi  में share  कर रहा हूँ . यह भाषण उन्होंने Symbiosis BBA  Programme 2008 के students के समक्ष दिया था.

Good Morning everyone ,  मुझे  यहाँ  बोलने  का  मौका   देने  के  लिए  आप  सभी  का  धन्यवाद . ये  दिन  आपके  बारे  में  है . आप , जो  कि  अपने  घर  के  आराम ( और  कुछ  cases में  दिक्कतों ) को  छोड़  के  इस  college में  आए  हैं  ताकि  ज़िन्दगी  में  आप  कुछ  बन  सकें . मैं  sure हूँ  कि  आप  excited हैं . ज़िन्दगी  में  ऐसे  कुछ  ही  दिन  होते  हैं  जब &nb ... Read more »
Views: 997 | Added by: manoj | Date: 12/01/2012 | Comments (1)

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, और परिवार समाज की पहली इकाई है, ये लाइने हम सबने बचपन में किताबो में पढ़ी हैं. एक मनुष्य की जिंदगी में परिवार का बहुत महत्व होता है खास कर किसी बच्चे की परवरिश में.

                   परिवार का माहौल बच्चे के सामाजिक और मानसिक विकास में बहुत अहम भूमिका निभाता है. बच्चा वही सीखता और करता है जिसकी शिक्षा उसे उसके माता-पिता उसे देते हैं. इसीलिए प्राचीन काल से ही परिवार को आरंभिक विद्यालय का दर्जा दिया गया है. अभिभावकों से मिली शिक्षा ही आगे चलकर व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करती है और उसकी यही चारित्रिक विशेषताएं समाज में उसकी भूमिका और पहचान निर्धारित करती हैं.

Views: 247 | Added by: manoj | Date: 09/01/2012 | Comments (0)

आज़ादी के कई दशकों बाद भी, सामाजिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों के बोझ तले दबी भारतीय महिलाएं अपनी स्वतंत्र पहचान साबित करने के लिए लगातार संघर्ष करती रही हैं. भले ही व्यावसायिक तौर पर वे कई ऊंचे मुकाम हासिल करती आई हों, लेकिन हमारा रुढ़िवादी समाज आज भी उन्हें एक असहाय और अबला के रूप में ही देखता है. यह वो समाज है जो लड़की के जन्म को एक अभिशाप मानता है और पैदा होते ही उसकी हत्या कर देना अपनी परंपरा समझता है. हालांकि समय बदलने के साथ ऐसी कुप्रथाओं पर कुछ हद तक विराम जरूर लगा है.
अब लड़कियों को पैदा होते ही नहीं मार दिया जाता, बल्कि उन्हें इस कदर शोषित किया जाता है कि उनका जीवन ही उनके लिए मजबूरी बन जाता है.
Views: 229 | Added by: manoj | Date: 09/01/2012 | Comments (0)



साधारण कमरे सरीखा जन्मस्थान और पार्क जैसे स्मारक में ग्रामीणों द्वारा चंदा जमा  कर लगाई गई मूर्ति। यह है भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक चंद्रशेखर आजाद की जन्मभूमि बदरका।।

उन्नाव का यह छोटा सा गाँव भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उस महानायक से संबद्ध है, जिसकी हुंकार ने ब्रिटिश राजसत्ता को डरा कर रखा था। यह उन जगहों में से एक है, जिन पर कवियों ने ‘चंदन है इस देश की माटी, तपोभूमि हर ग्राम है’ जैसी पंक्तियों की रचना की है। हाँ, हम बदरका में हैं, अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की ... Read more »
Views: 282 | Added by: manoj | Date: 06/01/2012 | Comments (1)



मंत्री महोदय, नमस्कार


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Views: 242 | Added by: manoj | Date: 06/01/2012 | Comments (0)


एक लड़की पर अत्याचार तब से ही शुरू हो जाता है, जब वह गर्भ में पल रही होती है। कई बार उसे जन्म ही नहीं लेने दिया जाता, क्योंकि वह लड़की है। यदि उसका जन्म हो भी जाता है तो उसे हर तरह से भेदभाव व शोषण का शिकार बनाया जाता है। जैसे-लड़कों को अच्छे भोजन देना, लड़कियों को नहीं, लड़कों को खेलने, पढ़ने, जन्मदिन मनाने तक सब की आजादी मिलती है, लड़की को नहीं। इन सबसे वंचित कर उसे घरेलू काम करने के लिए कहा जाता है, बल्कि मजबूर किया जाता है। अगर कोई लड़की इसका विरोध करती है तो उसको मारा-पीटा जाता है, धमकाया जाता है। उसे तरह-तरह के बुरे शब्द जैस- कुलक्षणी, चरित्रहीन इत्यादि कह कर ताने दिये जाते हैं।

अगर उसकी शादी नहीं होती है तो भी उसे ही अपशब्द कहा जाता है। एक तो लोग खेलने-कूदने की उम्र में लड़की को घर सम्भालने की जिम्मेवारी देते है, उसकी शादी कर देते हैं। शादी होते ही उसे अधिक से अधिक दहेज पाने के लिए प्रताडि़त किया जाता है। घर के सारे काम करवाये जाते हैं, मारते-पीटते हैं सो अलग। दहेज न मिलने पर उसकी हत्या तक कर दी जाती है। मारने के लिए जिंदा जलाने ... Read more »
Views: 292 | Added by: manoj | Date: 05/01/2012 | Comments (0)


बीपीओ सेक्टर के साथ आर्थिक मजबूती की उड़ान भरती नई हिन्दुस्तानी पीढ़ी ने यह सफलता अंग्रेजी का दामन थाम कर पायी है और हाल ही में 
यूनाइटेड स्टेट्स से आयी एक रिपोर्ट ने इस तथ्य पर प्रामाणिकता की मुहर लगा दी है। ब्रिटिश भाषाविज्ञानी तथा द स्टोरी ऑफ इंग्लिश के लेखक डेविड क्रिस्टल ने अपने शोध में कहा है कि भारत अब विश्व का सबसे बड़ा अंग्रेजी बोलने वाला राष्ट्र बन चुका है और यूनाइटेड स्टेट्स तक इससे पिछड़ गया है। डेविड का अनुमान है कि भारत में अंग्रेजी बोलने वाली आबादी 350 मिलियन का आंकड़ा पार कर चुकी है और इनमें से अधिकांश के लिए यह दूसरी ... Read more »
Views: 225 | Added by: manoj | Date: 05/01/2012 | Comments (0)


बाज को तूफान की जानकारी उसके आने के पहले ही हो जाती है। बाज इससे बचने के लिए कुछ ऊंचाई तक उड़ता है और तूफानी हवा के आने का इंतजार करता है। जैसे-जैसे तूफान आता है, बाज अपने पंखों को फैला लेता है और हवा उसे तूफान के ऊपर उठा ले जाती है। तूफान जब नीचे की ओर गरज कर तबाही मचा रहा होता है, बाज उसके ऊपर आराम से उड़ता रहता है। बाज तूफान से बचने की कोशिश नहीं करता, बल्कि यह तूफान को खुद को ऊपर उठाने देता है। यह उन हवाओं से ऊपर उठता है, जो तूफान को अपने साथ लेकर आती हैं। इसी तरह जब जीवन के तूफान हमारे सामने आते हैं और हम उनका सामना करते हैं, तब हम ईश्वर पर गहरे विश्वास और अपने दिमाग के इस्तेमाल से इनके ऊपर उठ सकते हैं। हमें ईश्वर की शक्ति को तूफान से ऊपर उठाने में मदद करने देना चाहिए। ईश्वर हमें तूफान की उन हवाओं-जो हमारे जीवन में बीमारी, दुर्घटना, असफलता और उदासी लाती ... Read more »
Views: 227 | Added by: manoj | Date: 05/01/2012 | Comments (0)




          सड़क हो या रेल की पटरी या फुटपाथ हो हम सभी ऐसे अनाथ बच्चों को देखते हैं, जिनमें से कुछ तो अपनी मर्जी से घर से भागे होते हैं तो कुछ पारिवारिक कलह की वजह से बाहर रहना पसंद करते हैं तो कुछ भगवान की कोप दृष्टि को भुगत रहे होते हैं. इन बच्चों को हम आ ... Read more »

Views: 269 | Added by: manoj | Date: 03/01/2012 | Comments (0)


सुनने में कुछ अजीब लगेगा, परंतु कड़वा सच है कि बिहार में एक लाख से अधिक सरकारी शिक्षकों को चपरासी से भी कम वेतन मिलता है। इन शिक्षकों को चपरासी भी ताने देते हैं, उन्हें आंखें दिखाते हैं। सरकारी दफ्तरों में काम करनेवाले चपरासी के वेतन आठ हजार से कम नहीं, परंतु इन शिक्षकों को चार से सात हजार ही मिलते हैं। पंचायत, ग्राम पंचायत, नगर पंचायत व प्रखंड के अनट्रेंड शिक्षकों को 4000, ट्रेंड को 5000 एवं हाईस्कूल के शिक्षकों को 6000 मानदेय के रूप में मिलते हैं। वहीं, प्लस टू के शिक्षकों को 7000 मानदेय, वो भी हर माह नहीं। कभी छह माह तो कभी आठ माह पर। इन शिक्षकों ने जब मानदेय बढ़ाने के लिए धरना-प्रदर्शन शुरू किया तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दो टूक शब्दों में कहा कि जिन्हें नौकरी करनी है करें, वर्ना दूसरी ढूंढ़ लें। उन्होंने यह भी कहा कि चपरासी सरकारी कर्मचारी हैं। ... Read more »
Views: 227 | Added by: manoj | Date: 03/01/2012 | Comments (0)

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